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पिता की सीख जीवन को सफल बनाती है:- धर्मलता जी

*”पिता की
बांगरदा(खरगोन) सांसारिक जीवन में संघर्षों के बाद एक पिता अपनी संतान को जीविकोपार्जन की कला सिखाता है। एवं समाज के योग्य अपनी संतान को बनता है। एक पिता को संघर्षों के बाद मिली प्रेरणा एवं सिख को अपनी संतान को सीखाता है। अगर अपने पिता के आदर्श वाक्यों को जीवन में उपयोग करें। तो जीवन सफल हो जाता है।
उक्त विचार व्यक्त करते हुए जैन साध्वी धर्मलता जी ने ग्राम बांगरदा में ग्रामीण महिलाओं से सीधी चर्चा करते हुए व्यक्त किये। आपने कहा कि सांसारिक जीवन में सभी को एक दिन मरना है परंतु जन्म से मृत्यु के बीच जो कर्म किए जाते हैं। उन कर्मों के माध्यम से ही व्यक्ति का नाम अमर हो जाता है। जीवन में हमेशा परोपकार परहित के कार्य ही मुक्ति प्रदान करते हैं। आपने प्रेरणास्पद एवं शिक्षाप्रद प्रसंग के माध्यम से अवगत कराया की हम सांसारिक जीवन में ग्रहस्थ होकर भी अच्छे कार्य कर, परोपकार कर धार्मिक अनुष्ठान कर, अपने जीवन को सफल बना सकते हैं। इसके साथ ही जैन साध्वी सुप्रतिभा जी एवं अपूर्वा जी ने भी प्रेरक शिक्षाप्रद प्रसंग सुनाए।
उल्लेखनीय है कि ग्राम बांगरदा निवासी सुरेश चंद्र संचेती की सुपुत्री कुमारी सरिता संचेती द्वारा सांसारिक जीवन से मोह त्याग कर विगत 20 वर्ष पूर्व जैन साध्वी की दीक्षा ग्रहण कर ली थी। एवं दीक्षा उपरांत उनको धार्मिक अनुष्ठान के उपरांत नया नाम “अपूर्वा” दिया गया था। 20 साल बाद श्वेत वस्त्र से सज्जित अपूर्वा के बांगरदा आगमन पर पिता सुरेश चंद्र संचेती, माता इंद्राबाई एवं भाई कमलेश संचेती द्वारा धार्मिक परंपरा के साथ स्वागत किया गया। इस अवसर पर ग्राम बांगरदा की महिलाओं द्वारा भी अपूर्वा साध्वी जी का आशीर्वाद लिया गया।
:- रामेश्वर फूलकर पत्रकार बांगरदा

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